🔶यदी यैसा हो आपका नेता
तो कैसा होगा कार्यकर्ता 🔶
चोर लुटेरे बहुमत से
चुनकर न जाये 🙏
🔶 यदी कीसि ने नोकरी के लीये रिश्ववत दि है तो निच्छीत रूपसे उन्हे उसीकी भरपाई हेतु भरपुर भ्रष्टाचार करना होगा l
यदी हमारे नेताने टिकीट देते वक्त हमसे चुवान हेतु पैसा लीया होगा या हमारे लिये पैसा खर्च कीया होगा तो यहभी निच्छीत है की हमे अपने गीरेबान मे झाॅकर यह देखना होगा की हमे समाजहीत मे कम और नेताके हीतमे अधिक काम करना होगा l
जैसे की सडक, बडेरास्ते, आरक्षित जगह, शिक्षा, आरोग्य साफ सफाई, पानी, अस्पताल यहा तक की जनसुरक्षा और शहर की हर एक सुविधा उन्ही नेता ओंके के इशारेपर चले ताकी अप्रत्यक्ष रूप से उन्ह सेवा सुविधाके सर्वप्रथम लाभार्थी वह नेता बने l कुछ ईसी तरहका शडयंत्र भ्रष्ठ नेता हमेशा रस्ते है l
अब आप कहेंगे उसमे उन्ह नेताओंका क्या फायदा है! तो आप उन्ह नेताओंके अंधभक्तीमे ईतने डुबे है की उन्हीके खीलाफ आप कुछ भि सुनना नही चाहते,
जनसेवाका सब मेवा वहीतो खाते है ! , बस प्रस्तावपर आप जैसे उन्हीके ही द्वारा चुने हुये नगरसेवकों का
हस्ताक्षर होता है l
आप जानते है की मनपाका सर्वाधिक कारभार ठेकेदारोंसे ही होता है l मनपाकी अस्थापना से लेकर अरबो खरबोंके विकास काम ठेकेदारीपर चलते है l सार्वजनिक बांधकामहो ,
रस्ता, सडक, गटर का निर्माण हो या यातायात व्यवस्था हो, या हो दुरूस्ती देखभाल l सबकुछ कंत्राटदार रही संभालते है और अरबो खरबों मेसे बीस टक्का ट्क्काअसुरोंको दिया जाता है l
भ्रष्टाचार आजकल शिष्टाचार मे तबदिल हुआ है ऐसा बोलकर यह गंभीर बातपर कोई बोलते नही लेकीन हम हमेशाही बोलते है तथा लक्षवेधीमे लेखते है l. राज्य और केंद्र से आनेवाला विकास निधी आखीर आप जैसे चुनेहुये नगरसेवकों द्वारा ही तो शहरमे वितरीत होता है l यही कारन हमे अपक्ष तथा गरीब उमेदवारोंको समर्थन देना चाहीये ऐसा हमे लगता है l
अब आप कहेंगे गरीब जादा भुखा! , है तो आप गलत समजते है , कालेधन से बनी हुयी सत्ता की भुख अधिक होती है, उन्हे पेटकेलीये या अपने परिवार के लीये नही, नगरसेवक खरीदनेके लिये पैसा चाहीये l आगे जाकर विधायक खरीदनेके लिये, यहा तक की और भी बडे पद पर जानेके लिये मंत्री तक को खरीदने हेतु पैसा चाहिये l
हमारे शहरके कुछ नेता यही कारन तो महानगरपालिका को अपने हात मे रखने हेतु आपसमे लढरहे है l एकदुजेके कपडे फाडकर हम अंदरसे कीतने नंगे है वह खुदही बतारहे है l उन्हीके अपने घोटाले उन्हीके ही जुबान से हम कल बतायेंगे जबतक के लीये हमारा कोई पक्ष नही, हम अपक्ष मानसिकता के है इतना ध्यान रखीये ! वैसे ही बहुमत गलत लोगोंके हातमे गया तो मनमानीका कारन बनता है l
चोर लुटेरे बहुमत से चुननेसे अछा जनताकी तीजोरी लुटले वालोंको रोखने वाले कुछ लोग तो होने चाहीये l चोर लुटेरे मनपामे बहुमतोंसे न जाये ईसिलीये हमारा यह प्रयत्न सदा रहेजा l
वसंत माने / संपादक सा. उरण शहर/ सा. सर्व श्रेष्ठ राजसत्ता तथा
ईसी शहरका करदाता

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